सौतेली मॉम की चूत में कुंवारे बेटे का मूसल लंड- 2

स्टेप मॉम सेक्स स्टोरी मेरी अपनी है. मेरी सौतेली मम्मी ने मेरा विशाल लंड देख अपनी सहेली को बताया कि मुझे ऐसा लंड चाहिए. इसके बाद क्या हुआ?

दोस्तो, मैं राजेश आपको देसी मम्मी की चूत चुदाई की कहानी सुना रहा था.
स्टेप मॉम सेक्स स्टोरी के पिछले भाग
मम्मी ने मेरा लंड पकड़ लिया
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी मम्मी अपनी आंखों पर और चेहरे पर पट्टी बांध कर मुझसे चुदवाने के लिए राजी हो गई थीं.

अब आगे स्टेप मॉम सेक्स स्टोरी:

अगले दिन का प्लान बनाया गया था.

मां और आंटी भी तैयार हो गई थीं.

कुछ टाइम बाद मम्मी का मेरे पास फ़ोन आया. वो बोलीं- बेटा तुम कहां हो?
मैं बोला- मैं तो अभी अपने घर आ गया हूँ, बोलिए क्या बात है?

वो बोली- कल घर आने का मन है.

मेरा दिमाग चकरा गया कि ये घर क्यों आने को बोल रही हैं, जबकि प्लान तो कुछ और है.

मैं बोला- मम्मी, अभी आपको चार या पांच दिन और रुकना होगा. जब तक मामा मामी वापस नहीं आ जाएंगे, तब तक नाना जी को अकेला छोड़ कर आप कैसे आ सकती हैं. फिर मेरी बाइक भी खराब हो गई है. मिस्त्री के पास देकर आया हूँ. उसने भी तीन दिन बाद बुलाया है.
अब मम्मी बोलीं- ठीक है, गाड़ी सही हो जाए और आने का तय हो जाए, तो बता देना.

इसके बाद मैंने आंटी के पास फोन किया.
मैंने आंटी से पूछा- मेरी मम्मी कल घर जाने को क्यों बोल रही थीं?

आंटी ने जो बताया, वो सुन कर मैं भौचक्का रह गया कि मम्मी का दिमाग कितना चलने लगा.
मम्मी पता लगा रही थीं कि मैं उन्हें कब लेने आऊंगा.

फिर मैंने आंटी से कहा- आंटी, कल का सब कुछ सही है न … कल आना है ना?
आंटी बोलीं- हां जरूर.

फ़ोन रख कर अगले दिन की योजना बनाने लगा.

सुबह हुई तो मैं घर से निकल लिया.

मेरा लंड खड़ा ही तन्ना रहा था, यही सोच सोच कर कि आज इतनी खूबसूरत उस औरत को चोदूंगा, जो रिश्ते में मेरी मम्मी है. जिसके बारे में सोच कर बहुत लोग उसके नाम के मुठ मारते हैं और उन्हें चोदना चाहते होंगे.

मैंने आंटी को फोन किया कि आप लोग कहां हो?
तो आंटी बोलीं- हम दोनों होटल पहुंच चुकी हैं.

ये होटल मामा के घर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर था.

मैंने पूछा- मेरी जान हैं आपके साथ?
मेरी बात सुनकर आंटी हंसने लगीं.

तो मम्मी ने आंटी से पूछा- क्यों हंस रही हो?
आंटी ने मम्मी से बताया- वो लड़का बोल रहा है कि मेरी जान है साथ में!
ये सुनकर मेरी मम्मी भी हंसने लगीं.

मैंने यह कह कर फोन कट कर दिया कि आप मेरी मम्मी को बिना कपड़े के बेड पर लेटे रहने को बोल देना, उन्हें आंखों पर पट्टी लगाने की बोल देना.

अब मैं होटल के पास पहुंच गया.
रूम नंबर मुझे पहले से पता था. रूम के पास आकर मैंने फिर से फ़ोन किया कि मैं आ गया हूं.

ये बात सुनकर मम्मी घबराने लगीं. उन्हें कुछ बेचैनी हो रही थी.

मम्मी आंटी से बोलीं- यार, बहुत डर लग रहा है.
आंटी ने कहा- अरे कुछ नहीं होगा.

आंटी मेरी मम्मी को समझाकर मेरे पास बाहर आ गईं और बोलीं- तुम्हारी मम्मी एकदम घबराई हुई है, वो कांप भी रही है. जाओ अन्दर और उसे संभालो. अन्दर जाकर अपनी मम्मी की खूब चुदाई करो. फिर मेरा भी ख्याल कर लेना.

आंटी ने ये सब हंस कर कहा, तो मैंने ओके कहा और कमरे का दरवाजा खोला.

मेरा दिल जोर से धड़कने लगा.
मैं अपने आपको सम्भालकर रूम के अन्दर गया तो देखा मम्मी बिल्कुल नंगी थीं.

क्या बताऊं दोस्तो एकदम टाइट कड़क दूध, मक्खन जैसा बदन, मम्मी की चूत पर छोटे छोटे बाल, होंठ एकदम लाल, पेट अन्दर की तरफ ऐसा हल्का सा दबा हुआ मानो उर्वशी रौतेला का शरीर हो.

मैं मम्मी के एकदम पास गया और देखा मम्मी के होंठ हल्के हल्के थिरक रहे थे … वो लंबी लंबी सांसें भी ले रही थीं, एकदम कामुकता के साथ डरी सहमी हुई थीं.

मैंने तुरंत अपने सब कपड़े उतार दिए. मेरा लंड बाहर हवा में लहराने लगा.

फिर मैंने अपनी मम्मी के शरीर को हल्के हाथों से छुआ, तो वो सिहर उठीं.

यार मैं क्या बताऊं … मैं अभी उस वक्त का मंजर लिख रहा हूँ तो वही सब सीन सोच कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है.

मैंने अपनी मम्मी के पास आकर उनके गालों पर किस किया और अपने होंठों से उनके कान को सहलाने लगा.

मेरी मम्मी एकदम सिमट सी गईं और उनकी दशा एकदम ठंड में ठिठुरने जैसी हो गई.
वो ठिठुरन में जैसे आवाज आती है, वैसे आवाज निकालने लगी थीं. उनके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए थे.

इसके बाद बिना देरी किए मैंने अपना लंड मम्मी के हाथ में रख दिया.
मेरा लंड उनके हाथों में जाते ही वो एकदम से चिहुंक गईं.

हल्की हल्की कंपकंपाती सी आवाज में बोलने लगीं- ये बहुत मोटा है और मस्त है.

दोस्तो, मेरा शरीर भी अकड़ रहा था, मैंने तुरंत मम्मी के गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
मम्मी ने मुझे कसके जकड़ लिया.

मैं उनके होंठों को अपने होंठों से दबाकर चूसने लगा.
वो भी मेरा साथ दे रही थीं.

मैं उनके मम्मों को भी मुँह से चूस रहा था, कभी हाथ से सहला रहा था.

फिर धीरे धीरे उनके पेट पर चुम्बन करते हुए मैं अपनी मम्मी की चूत तक आ गया.
मम्मी की चूत भी गोरी थी.

जब मैंने चूत की फांकों को हल्का सा फैलाया तो मम्मी की चूत के अन्दर एकदम गुलाबी सा था.
मैं जन्नत में पहुंच चुका था.

मैंने जैसे ही अपनी मम्मी की चूत को चाटने के लिए जीभ को चूत पर रखा, तो मम्मी एकदम से सिहर गईं. उन्होंने अपने पैर चिपका लिए.

फिर मैं मम्मी के दोनों पैरों को फैलाकर चूत चाटने लगा.
मेरी मम्मी अजीब अजीब सी आवाजें निकल रही थीं.

मैं अन्दर तक जीभ को डालकर जीभ को इधर उधर हिला रहा था.
मेरी मम्मी अपना शरीर टाइट करके मजा ले रही थीं.

लगभग दस मिनट तक मैं मम्मी की चूत चाटता रहा.
फिर मैं उठकर मम्मी के मुँह के पास अपना लंड ले गया.

मम्मी ने लंड पकड़कर अपने मुँह में ले लिया. मेरा लंड उनके मुँह में सही से नहीं जा रहा था, वो जबरदस्ती लंड ले रही थीं.

उसी दौरान उनके दांतों से मेरे लंड को खरौंच आ रही थी.

मैंने सोचा क्यों न अब आंख की पट्टी को हटा दिया जाए.
फिर सोचा पहले लंड को मम्मी की चूत में डाल लेता हूं, फिर पट्टी को हटाऊंगा, नहीं तो ये चूत चोदने नहीं देंगी.

अब मेरी मम्मी वासना से चिल्ला रही थीं- प्लीज़ मुझे चोद दो, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है.

मैंने उठ कर सीधा उनकी चूत पर अपना लंड रखा.

अपनी गर्म चूत पर लंड पाते ही मम्मी बोलीं- आपका लंड बहुत मोटा और बड़ा है, थोड़ा धीरे से पेलिएगा.

मैंने उनकी एक नहीं सुनी और लंड चूत के छेद पर रख कर जोर का एक झटका दे दिया.

मेरी मम्मी जोर से चिल्ला पड़ीं- ओह माँ मर गई … आंह छोड़ दो.
मम्मी पूरी तरह से मुझसे चिपक कर छटपटा उठीं.

मेरा लंड अभी आधा भी नहीं गया था.
वो इतने में ही छोड़ देने की बोलने लगी थीं- आंह मर गई … निकाल लो प्लीज़ … रहने दो … अब नहीं करना … लंड निकालो बाहर!

मैं भी पूरे जोश में था. मैंने सोचा कि अब कुछ भी हो जाए, पूरा पेलकर ही रहूंगा. मैं चुप था और अपनी मम्मी को किस करने लगा.

वो एक ही रट लगा रही थीं- बाहर निकालो प्लीज़ निकालो.

मगर मैं कहां कुछ सुनने वाला था … किस करता रहा और लंड पेलने की कोशिश करता रहा.

मैंने थोड़ा सा लंड बाहर किया तो मम्मी थोड़ा शांत हुईं.
उसी समय मैंने एक और झटका दे दिया.

इस बार मेरा पूरा लंड मम्मी की चूत में घुसता चला गया.
मम्मी इस बार और तेज चिल्लाईं- अरे मम्मी रे … मैं मर गयी.

मैं डर गया कि मम्मी को कुछ हो ना जाए इसलिए कुछ टाइम तक वैसे ही रुक गया.

मेरी मम्मी पानी मांगने लगीं और कंपकंपाने लगीं.
मैंने लंड बाहर निकाल लिया और बगल से पानी का बोतल उठा कर उन्हें पानी पिलाया.

फिर थोड़ा रेस्ट करने के बाद मैंने अपना लंड वापस चूत में पेला और अन्दर बाहर करने लगा.
इस बार वो मुझे अपनी बांहों में भरके हल्की हल्की आवाजें निकाल रही थीं और बीच बीच में बोल रही थीं कि पेट में नाभि के पास दर्द कर रहा है थोड़ा आराम से पेलो.

साथ ही वो अपने दांतों से मेरा कभी गाल पकड़ रही थीं तो कभी कान काट रही थीं.
मेरी पीठ पर नाखून भी गड़ा रही थीं.

कुछ देर बाद वो एकदम जोश में आ गयी और चुदाई का मजा लेने लगीं.
अब मैंने सोचा पट्टी हटाने का यही सही समय है.

मैंने आवाज बदल कर मम्मी से पूछा- क्या मैं आपको अच्छे से चोद रहा हूँ?
मां बोलीं- यस मेरे राजा.

फिर मैंने बोला- क्या मैं आपकी पट्टी हटा दूँ.
मां बोलीं- आप मुझे पहचानने के बाद मुझे रुसवा तो नहीं करोगे न?

मैं बोला- क्या आप मेरी चुदाई से संतुष्टि नहीं मिल रही है?
मां बोलीं- बहुत मजा आ रहा है. ऐसे मोटे लंड से चुद कर शायद मैं पहली बार तृप्त हो रही हूँ. मैं ये चुदाई कभी नहीं भूल पाऊंगी और ना ही आपको. अब तो मुझे हमेशा आपकी जरूरत पड़ेगी.

मैं मम्मी से बोला- जब आपको मेरी जरूरत पड़ेगी, तो आप ही मेरे पास मुझसे चुदने आओगी. जब मुझे आपकी चूत चुदाई करने मिलती रहेगी, तो मैं आपको रुसवा क्यों करूंगा!
मम्मी बोलीं- हां वो तो है. मैं ये चुदाई कभी नहीं भूलूंगी … मेरी जान निकल गयी थी लेकिन अब बहुत अच्छा लग रहा है.

मैंने मम्मी से पूछा- क्या आपके पति खुश नहीं कर पाते हैं?
इस पर मम्मी बोलीं- मेरे पति का लंड भी ठीक है … वो मुझे खुश कर देते हैं, लेकिन जब से मैंने अपने बेटे का लंड देखा है, मुझे आपके जैसे लंड से चुदने की इच्छा हो गई थी.

मैंने मम्मी से बोला- आपके बेटे का लंड क्या मेरे लंड से भी बड़ा है?
मम्मी बोलीं- मेरी आंखों पर पट्टी बंधी है, मैंने आपका लंड तो नहीं देखा लेकिन अनुमान से बता सकती हूं कि मेरे बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा है. आप चोद रहे हैं और मेरे दिमाग में आपका लंड अपने बेटे का लंड जैसा लग रहा है. मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं अपने बेटे से चुद रही हूँ.

मैं बोला- तो आप अपने बेटे से क्यों नहीं चुदवा लेतीं. मैं तो अपनी मम्मी को चोद चुका हूं.

ये सुनकर मेरी मम्मी बोलीं- ये आप क्या बोल रहे हैं … मैं अपने बेटे से, नहीं कभी नहीं … लेकिन क्या सच में आप अपनी मम्मी को चोद चुके हैं?
मैं बोला- हां मेरी मम्मी बहुत अच्छी हैं. जब उन्होंने पहली बार मेरा लंड देखा था, तो मुझे पटा कर चुदाई कराने लगी थीं. आप भी कोशिश कीजिएगा. लंड और चूत का रिश्ता सिर्फ चुदाई का ही होता है.

मां बोलीं- मुझसे नहीं हो पाएगा, वो मेरा बेटा है. आपकी मम्मी आपके साथ कैसे चुदी होंगी … ये वही जाने.
मैं- आपके दिमाग में आपके लड़के का लंड आता है ना बार बार … क्या कभी ये नहीं ख्याल आया होगा कि उसके लंड से चुदवा लूं?

मां- हां ये तो हमेशा आता है … लेकिन आज आपका लंड अपनी चूत में लेने के बाद शायद मैं अपने बेटे के लंड के बारे में न सोचूं.
मैं- अगर मैं ही आपका बेटा निकलूं, तो आप क्या करोगी?

मम्मी- ऐसा तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि वो घर पर है … चलिए मैं आपकी बात मान भी लेती हूं कि आप मेरा बेटा भी निकले, तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
मैंने मम्मी से कहा कि आपकी आंखों की पट्टी हटा दूँ?

वो बोलीं- हां ठीक है. मैं आपका भी लंड देख लूंगी कि मेरे बेटे के लंड से कितना बड़ा है.

मैंने मम्मी के एक दूध को अपने मुँह में लेकर हाथ ऊपर की तरफ करके उनकी पट्टी को हटा दिया.
मम्मी चुप थीं और मैं उनके मम्मों को चूस रहा था.

फिर मैंने कहा- आप अपनी आंख बन्द कीजिए.
उन्होंने आंखें बन्द की, मैं ऊपर की तरफ आकर उनके होंठों को चूमने लगा और बोला- अब आप अपना आंख खोलिए.

जैसे ही मम्मी ने आंख खोली, मुझे देख कर उनके चेहरे का रंग उतर गया और वो अवाक हो गईं.

उसी समय मैंने मम्मी को तेजी से चोदना शुरू कर दिया था तो मेरा मोटा लंड मेरी मम्मी की चूत को भोसड़ा बनाने में लगा हुआ था.
उनकी टाईट चूत मेरे लंड को चारों तरफ से पकड़ बनाए हुई थी.

मैं जोर जोर से मम्मी को चोद रहा था.
वो अपनी आंखें बंद करके नागिन के जैसे मचल रही थीं.
उनकी चूत की आग ने अपने बेटे के लंड को स्वीकार कर लिया था.

अब वो मेरा पूरा साथ दे रही थीं और ‘आह … आह आह … उई … उन्ह मम्मी …’ की आवाजें निकाल रही थीं.

कुछ मिनट में बाद उन्होंने अपने शरीर को खूब टाइट कर लिया था और जोर जोर से अपनी कमर हिलाने लगी थीं.

कुछ टाइम बाद ‘उफ … उफ़ …’ की आवाज के साथ वो चरम पर पहुंचने लगी थीं.

मैं जोर जोर से चोदता रहा.
इतने में मम्मी एक बार तेज ‘आह … उह गई गई …’ की आवाज के साथ पानी छोड़ने लगीं.

उनका शरीर कड़क और चेहरा एकदम लाल हो गया था. उनकी चूत से पानी निकलने लगा था. सारा बेड भीग गया था. वो एकदम से ढीली पड़ गईं और हांफने लगीं.

इधर मैंने अपनी रफ्तार को बढ़ा दिया और कुछ समय बाद मैंने मम्मी की चूत में ही अपना सारा वीर्य गिरा दिया.
मैं भी मम्मी के बाजू में ही सो गया.

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